कहानी हरियाणा के तीन लाल की
यह 1966 ई. की बात है, जब हरियाणा नया राज्य बना था. राज्य बनते ही हरियाणा की राजनीति में तख्तापलट का खेल शुरू हो गया था. ये वह दौर था, जब सरकारें आ रही थी और जा रही थी. उस समय हिंदी की एक कहावत...
जब सच कहने की सजा मिली किशोर कुमार और देवानंद को
क्या आपको पता है कि पाश्र्व गायक किशोर कुमार के गाने पर रोक लिया दिया गया था ? घटना उस समय की है, जब देश में आपातकाल लगाया गया था. उस समय उनके गाने पर से रोक हटाने में बाॅलीवुड अभिनेता देव आनंद की बड़ी...
संगीत सरिता: चाय की चुस्कियों के संग आनंद
“श्रोताओं आज हमारे साथ हमारे कार्यक्रम में गुलजार और ----???” आप सभी को यह वाक्य तो याद ही होगा. अगर नहीं याद तो मैं याद दिलाता हूं. ‘संगीत सरिता’, दोस्तों कुछ याद आया? यह वही कार्यक्रम है, जहां यह वाक्य हम रोजाना सुना करते थे....
पैरों की धूल नहीं, माथे का चंदन है नारी
कहते हैं नारी जब शांत है, तब लक्ष्मी है. जब रौद्र रूप में आ जाए, तो महाकाली जैसी हो जाती है. एक नारी से दो घर जुड़ते हैं. दो परिवारों में खुशियां आती हैं. घर की नींव मजबूत करने का हौसला सिर्फ एक नारी के...
सांप है पाप, तो सीढ़ी है पुण्य
सांप-सीढ़ी का खेल बचपन में हम सभी ने एक बार तो जरूर खेला होगा. अब आप कहेंगे कि एक बार नहीं कई बार खेला है. इस खेल का महत्व तो सिर्फ नब्बे के दशक की पीढ़ी ही समझ सकती है. उस समय ना आज के...
हर व्यंजन की जान है चटनी
हमें खाने में चटपटा मिल जाए, तो स्वाद कई गुना बढ़ जाता है. बात जैसे ही चटनी की होती है, तो मुंह में पानी आ जाता है. भूख बढ़ जाती है. आँखों के सामने तरह-तरह के व्यंजन दिखने लगते हैं. कभी-कभी खाना अधूरा सा लगता है....
सभ्यता द्वार : पाटलिपुत्र में सम्राट अशोक की दास्ताँ
अब तक मुंबई में गेटवे ऑफ इंडिया और नई दिल्ली में इंडिया गेट था. अब पटना में भारत का तीसरा गेट बना है, जिसे गेटवे ऑफ बिहार कहा जा रहा है. बिहार की राजधानी पटना में गंगा तट पर बने इस गेट का नाम दिया...
क्यों है छप्पन भोग की मान्यता?
छप्पन भोग क्या होता है और इसे क्यों भगवान को प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है ? यह सवाल आपके मन में भी आता होगा. आज हम इससे जुड़ी जानकारी आपके साथ साझा करते हैं. क्या कारण और कहानी है इसके पीछे, आपको बताते...
महादेवी वर्मा : जिन्होंने व्यथा को भी दिया सौंदर्य
वे मुस्काते फूल, नहीं जिनको आता है मुरझाना, वे तारों के दीप, नहीं जिनको भाता है बुझ जाना जब हम किसी रचना को पढ़ते हैं, तो उस रचना में इतनी ताकत होती है कि उनके एक-एक शब्द को हम जीने लगते हैं. उन रचनाओं में...
फ़िजी : यहाँ लोगों के दिलों में बसता है भारत
जब भी हम दूसरे देश में अपने देश की भाषा सुनते हैं, तो दिल को सुकून मिलता है. सुकून इसलिए क्योंकि पराए देश में कोई अपना मिल जाए तो अपने देश से दूर रहने का एहसास ही नहीं होता. भारतीय हर देश, हर द्विप पर...
नए मानक गढ़ती हिंदी
किसी भी राष्ट्र की पहचान उसकी भाषा और संस्कृति से होती है. 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से निर्णय लिया कि हिंदी ही भारत की राजभाषा होगी. देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने कहा कि इस दिन के महत्व देखते...
जब सफलता की गारंटी बन गया था नौशाद साहब का नाम
‘मन तड़पत हरी दर्शन को आज’, ‘नन्हा मुन्हा राही हूँ’, ‘यह गोटेदार लहंगा निकलू जब डाल के’, जैसे गाने आज कहाँ बनते हैं? आज तो धूम-धड़ाका वाले गाने ज्यादा पसंद किए जाते हैं. गानों की हम जब बात करते हैं, तो उसका संगीत और बोल...
पत्रकारिता को मजबूती प्रदान कर रही है हमारी हिंदी
पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है. लोकतंत्र तभी मजबूत होगा, जब पत्रकारिता अपनी सार्थक भूमिका निभाए. सार्थक पत्रकारिता का उदेश्य है कि वह प्रशासन और समाज के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बने. समय के साथ हिंदी पत्रकारिता समर्थ होती जा रही है. हिंदी...








