जितना ही आम इस फल का नाम है, उतना ही खास फल है यह आम। काफी रसीला और मीठा फल आम जिसे फलों का राजा भी कहा जाता है दिन पर दिन फलों में हर किसी की पहली पसंद बनता जा रहा है। आज के...
भारत को धरती का गौरव तथा प्रकृति का पुण्य लीलास्थल कहा गया है। विश्व में भारत ही एक ऐसा देश है जहां समय-समय पर विभिन्न ऋतुएं अपनी छटा बिखेरती हैं। मुख्य रूप से भारत में 3 ऋतुएं है- शीत, ग्रीष्म, और वर्षा ऋतु। भारतीय मौसम...
गुरुदेव 'रबीन्द्रनाथ टैगोर’ 6 मई 1861- 7 अगस्त 1941 https://www.youtube.com/watch?v=xoXg_OuhWzA "जो धरती की आत्मा के निकट है, जो उससे ही बने, उसी में ढले हैं, जो अपना अंतिम विराम उसी में पाएंगे, मैं उन सब का मित्र हूं, मैं कवि हूँ।" साहित्य की हरेक...
भारत में तेजी से बढ़ते निर्यात अवसरों और वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की बढ़ती मांग के बीच, भारतीय व्यवसायों और MSME उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए तैयार करने के उद्देश्य से ‘XpoExpert’ नामक एक नई पहल की शुरुआत की गई है। इस पहल...
टीम हिन्दी पंचांग का अनुवाद ‘पांच अंग’ के रूप में किया जाता है जो भारतीय ज्योतिष की सबसे महत्वपूर्ण नींव है। हम कह सकते हैं कि पंचांग वैदिक ज्योतिष की डायरी या कैलेंडर है। पंचांग किसी व्यक्ति की कुंडली तैयार करने और अपनी जिंदगी की...
विभिन्न संस्कृतियों एवं अनेक सभ्यताओं वाला हमारा देश भारत आज अपने समृद्ध साहित्य एवं इतिहास हेतु जाना जाता है। यहां ऐसी कई ऐसी महान विभूतियां हुई जिन्होंने इस धरा को अपने पवित्र कर्मों से सुशोभित किया। और कहीं न कहीं इस देश का नाम भारत...
ॐ नमस्ते शारदे देवी, सरस्वती मतिप्रदे वसत्वम् मम जिव्हाग्रे, सर्वविद्याप्रदोभवः। अर्थात - 'हे देवी शारदा! आपको मेरा प्रणाम। हे विद्या दायिनी देवी सरस्वती! आप मेरी जिव्हा के अग्र भाग में निवास कीजिए तथा मुझे समस्त विद्याओं का ज्ञान दीजिए।' बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती...
अक्सर ये ज़िंदगी हमसे ये खेल खिलवाती है, किसी की ज़िंदगी में अच्छा और किसी की में बुरा बनवाती है, कुछ पलो की ख़ुशी और इतने गम दे जाती है, ये ज़िंदगी हमसे ये खेल खिलवाती है | कभी हंसता खेलता बच्चा तो कभी एक...
टीम हिन्दी यदि यह कहा जाए कि दिवाली किसी धर्म विशेष का त्योहार नहीं, बल्कि खुशियों का त्योहार है, तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी. यही कारण है कि अब दिवाली केवल भारत में नहीं, बल्कि कई दूसरे देशों में भी मनाया जाता है. यह पर्व...
“न कार्तिकसमो मासः न देवः केशवात्परः । न वेदसदृशं शास्त्रं न तीर्थं गङ्गया समम् ।।” अर्थात्- कार्तिक मास के समान कोई मास नहीं है, श्रीविष्णु से बढ़कर कोई देवता नहीं है, वेद के तुल्य कोई शास्त्र नहीं है और गंगा के समान कोई तीर्थ नहीं...
टीम हिन्दी वैदिक काल से ही भारतीय संस्कृति वीरता की पूजक और शौर्य की उपासक रही है। हमारी संस्कृति कि गाथा इतनी निराली है कि देश के अलावा विदेशों में भी इसकी गुंज सुनाई देती है। तभी तो पुरी दुनिया ने भारत को...
नई दिल्ली। दिल्ली के पूर्व महापौर व हिंदी भाषा के पुरोधा स्व. महेश चंद्र शर्मा जी की स्मृति में गठित न्यास द्वारा शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में हिंदी भवन, दिल्ली में शिक्षक सम्मान एवं छात्रवृत्ति समारोह का आयोजन शनिवार, 6 सितंबर 2025 को हुआ। महेश...
सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यंबके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ।। अर्थात्- हे नारायणी! तुम सब प्रकार का मंगल प्रदान करने वाली मंगल मयी हो, कल्याण दायिनी शिवा हो, सब पुरुषार्थो को सिद्ध करने वाली, शरणागत वत्सला, तीन नेत्रों वाली एवं गौरी हो। सर्वप्रथम, तुम्हें...
नई दिल्ली। वैसे तो हिंदुओं में मान्यता है कि वास्तुशास्त्र के देवता के रूप में स्वयं भगवान विश्वकर्मा स्थापित हैं। हम जब भी कोई घर, दुकान या कोई अन्य प्रतिष्ठान बनाते हैं तो वास्तु का विशेष ध्यान रखा जाता है। वास्तु में दिशा, प्रकाश, वायु,...
जब भी हम और आप किसी के रंग-रूप से उसका आकलन करते हैं, तो गलत साबित होते हैं. सही में उसके बारे में विस्तार से जानना है, तो उसके व्यक्तित्व और कृतित्व का आकलन करना होगा. ऐसा ही कुछ हाल है अभिनेता टाॅम अल्टर के...