मजेदार

कान्हा की बांसुरी में आज भी कायम है जलवा

टीम हिन्दी बाँसुरी की अभिव्यक्त शक्ति अत्यंत विविधतापूर्ण है, उससे लम्बे, ऊंचे, चंचल, तेज़ व भारी प्रकारों के सूक्ष्म भाविक मधुर संगीत बजाया जाता है। लेकिन इतना ही नहीं, वह विभिन्न प्राकृतिक आवाज़ों की नक़ल करने में निपुण है, उदाहरण के लिये उससे नाना प्रकार...

मन को आनंदित करता सितार

टीम हिन्दी सितार परंपरिक वाद्य होने के साथ ही सबसे अधिक लोकप्रिय है और सितार ऐसा वाद्य यंत्र है जिसने पूरी दुनिया में हिन्दुस्तान का नाम लोकप्रिय किया. सितार को भारत का राष्ट्रीय वाद्य यंत्र होने का गौरव भी प्राप्त है. सितार बहुआयामी साज होने...

सिनेमाई गीत को नया रंग दिया पंचम दा ने

टीम हिन्दी पंचम दा के नाम से मशहूर संगीतकार आर डी बर्मन ने लगातार तीन दशकों तक हिंदी सिनेमा पर राज किया और 331 फिल्मों को अपने संगीत से सजाया. पंचम जितना अपने संगीत के लिए मशहूर थे, उतना ही अपनी आवाज के लिए भी....

तुलसी एक महत्त्व अनेक

टीम हिन्दी भारतीय संस्कृति के चिर पुरातन ग्रंथ वेदों में भी तुलसी के गुणों एवं उसकी उपयोगिता का वर्णन मिलता है. हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे का बहुत महत्व है. तुलसी के पौधे को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है. हिंदू धर्म में...

ऐसे तय किया है रुपया ने अपना सफर

टीम हिन्दी यदि यह कहा जाए कि हमारा और आपका कोई भी काम अब रुपया के बिना नहीं हो सकता है, तो यह कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी. लेकिन, क्या आपको पता है कि रुपया शब्द कब आया ? भारतीय रुपये को कहां-कहां मान्यता थी ?...

कितना जानते हैं सिंहासन बत्तीसी के बारे में?

टीम हिन्दी आप में से कई लोगों ने दूरदर्शन पर सिंहासन बतीसी देखा होगा। कई लोगों ने इसे पढ़ा भी होगा। असल में, सिंहासन बत्तीसी (संस्कृत - सिंहासन द्वात्रिंशिका, विक्रमचरित) एक लोककथा संग्रह है। प्रजा से प्रेम करने वाले, न्याय प्रिय, जननायक, प्रयोगवादी एवं दूरदर्शी...

ग्रामीण सोच, परिवेश को परदे पर उतारती लापतागंज

टीम हिन्दी भारत गांवों में बसता है. गांव यानी समाज. सामाजिक सरोकार से सराबोर वहां के लोग. शहरों-महानगरों वाली समृद्धि नहीं हो वहां, लेकिन मानवीय संवेदना हरेक के पास है. संवेदनाओं को हंसी के पुट के साथ करोड़ों लोगों तक पहुंचाया है शरद जोशी ने....

क्या है पूरी कहानी, हाथ कंगन को आरसी क्या?

टीम हिंदी “हाथ कंगन को आरसी क्या, पढ़े लिखे को फ़ारसी क्या” वाली कहावत भी है जिसकी दोनों पंक्तियों की आपसी रिश्तेदारी उलझन भरी है। यह जानना ज़रूरी है कि इस कहावत के दो पद हैं। पहला पद है “हाथ कंगन को आरसी क्या” दूसरा...

नीरज: जिनके बोल लोगों की जुबान पर चढ़ गए

सुभाष चंद्र यूं तो बॉलीवुड में कई गीतकार हुए हैं. एक से बढ़कर एक गीत लिखे हैं. लेकिन गोपाल प्रसाद नीरज उस भीड़ में अकेले ऐसे गीतकार हुए, जिनके बोल लोगों की जुबान पर चढ़ गए. हर शहर, हर नगर. हर गांव, हर कस्बा में...

कहां से आईं कठपुतली ?

कठपुतली का नाम सुनते ही जेहन में सबसे पहले राजस्थान का नाम आता है. माना जाता है कि कठपुतली लोक कला का इतिहास लगभग 1500 साल पुराना है. यह लोक कला राजस्थान के नागौर तथा मारवाड़ जिले के भट आदिवासी जाति के लोगों का पारंपरिक...

मिथिलांचल की गरीबी का सौंदर्य है सिक्की कला

मिथिला पेंटिंग का डंका देश ही नहीं, विदेशों में भी बज रहा है, लेकिन उसी मिथिलांचल की एक कला आज अपने अस्तित्व और प्रचार-प्रसार के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहा है. यह कला है - सिक्की कला. सिक्की कला से बननेवाली कलाकृतियाँ न केवल खूबसूरत...

हिंदी सिनेमा के एक्टर्स: खाते देशी, बातें विदेशी

भारत में वैसे तो बहुत सी भाषाओँ में फ़िल्में बनती है, और उसका अपना एक दर्शक वर्ग भी है. लेकिन इन सभी फिल्मों के एक्टर्स में एक बात कॉमन है, ये बातें सिर्फ अंग्रेजी में ही करना पसंद करते हैं. भोजपुरी, दक्षिण भारतीय या किसी...