सम्पूर्ण भारत

भारत का गौरव: हिमालय

टीम हिन्दी हिमालय भारत की धरोहर है। हिमालय पर्वत की एक चोटी का नाम 'बन्दरपुच्छ' है। यह चोटी उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल ज़िले में स्थित है। इसकी ऊँचाई 20,731 फुट है। इसे सुमेरु भी कहते हैं। हिमालय एक पूरी पर्वत शृंखला है, जो भारतीय उपमहाद्वीप...

विश्व भर में पहुँच है हमारी हिन्दी की

यदि यह कहा जाए कि 21वीं विज्ञान एवं तकनीक के सहारे पूरी दुनिया एक वैश्विक गाँव में तब्दील हो रही है और स्थलीय व भौगोलिक दूरियां अपनी अर्थवत्ता खो रहीं हैं, तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी. वर्तमान विश्व व्यवस्था आर्थिक और व्यापारिक आधार पर ध्रुवीकरण...

भारतीय नववर्ष- घर के खालिश सोने को छोड़कर विदेशी पीतल को सोना समझने की आदत को होगा बदलना! 

भारत की अपनी अद्भुत काल गणना है। तदपि देश की युवा पीढ़ी विदेशी नववर्ष के मोह में पड़ कर भ्रमित हो रही है। घर के ख़ालिस सोने को छोड़कर विदेशी पीतल को सोना समझने की आदत को बदलना होगा। भारत की कालगणना सम्पूर्ण रूप से वैज्ञानिक...

भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की त्रिमूर्ति भारत के लिए रहेगी वंदनीय!

"वे झूल गए थे फांसी पर मेरी आज़ादी की खातिर"  कुछ एहसान ऐसे होते हैं जिनको हम कभी नहीं उतार सकते। भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की त्रिमूर्ति सदा से भारत के लिए वंदनीय थी है और रहेगी। 8 अप्रैल 1929 को अंग्रेजों की बहरी...

ओरछा जितना पौराणिक उतना ही ऐतिहासिक भी!

मध्यप्रदेश का ओरछा जमुना की सहायक नदी बेतवा नदी के किनारे बसा एक पौराणिक शहर है। ओरछा भारतीय इतिहास की स्थापत्य कला का बेजौड़ नमूना है। इसी खूबी के कारण यह देश विदेश के सैलानियों के लिए कौतुहल का विषय है। गंगा यमुनी संस्कृति की...

उफनती भागीरथी नदी के वेग को शांत करता है हरिद्वार!

देवताओं की असीम अनुकम्पा, प्राकृतिक संपदा, नैसर्गिक सुन्दरता, शुद्ध वातावरण को मिलाकर बनता है देवभूमि उत्तराखंड। उत्तराखंड उत्तर और खंड के मेल से बना वह प्रदेश है जिस पर प्रकृति ने जी भर का प्यार बरसाया है। उत्तराखंड का नाम सुनते ही हरे भरे पहाड़,...

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस विशेष- अहो मेरा भाग्य!

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं! अहो! मेरा भाग्य .. चार दीवारी का यह मकान, अहो! मेरा भाग्य है मेरी कर्मभूमि भी, यही मेरी पहचान सिमटा ली है मैंने अपनी दुनिया इन्ही दीवारों के मध्य ! कोने मैं रखा वह झाड़ू सिंक में पड़े झूठे बर्तन...

एक विधायक, जिनका दिल ओ दिमाग है केवल जनता के लिए

सिद्धांत रूप में कहा जाए तो राजनीति में लोग आते हैं जनता की सेवा के लिए। व्यवहारिक रूप में यह कम मेल खाता है। कई नेता अपवाद होते हैं, जो केवल और केवल जनता के हित की बात करते हैं। उनके लिए जीते और मरते...

भारत का गौरव : भारतीय साहित्य

टीम हिन्दी तमाम भारतीय भाषाओं में रचित साहित्य ही सच्चा भारतीय साहित्य है। सभी समान अधिकार के पात्र हैं। यह बात अलग है कि हिन्दी का क्षेत्र और पहुँच अन्यों से अधिक है। साथ ही यह भी सच है कि प्रान्तीय भाषाओं का लेखन हिन्दी...

आस्था का महापर्व है छठ : डॉ बीरबल झा

प्रकृति-पूजोपासना का महापर्व छठ बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और झारखंड में मनाया जाने वाला एक लोक-आस्था का त्योहार है, मगर इस पर्व को मनाने के पीछे जो दर्शन है, वह विश्वव्यापी है। शायद यही कारण है कि प्रवासी पूर्वाचलियों के इस पर्व के प्रति लोगों...

भारतीय भाषाओं में क्या है समानता ?

टीम हिन्दी भारत सांस्कृतिक विविधता के साथ ही साथ भाषाई विविधता वाला देश है। कोस-कोस पर बदले पानी चार कोस पर बदले वाणी की कहावत इसी परिपेक्ष्य में प्रचलित रही है। अनेक बदलावों के बाद भी आज भारत की सांस्कृतिक और भाषाई विविधता अपने मूल...

कैम्ब्रिज इंग्लिश ने भारत में एडिफाई एजुकेशन के साथ भागीदारी की

नई दिल्ली। कैम्ब्रिज एसेसमेंट इंग्लिश, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के एक विभाग ने एमडीएन एडिफाई एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड के साथ अपनी साझेदारी की घोषणा की है। यह संयुक्त पहल भारतीय शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा अनुबंध है, जिससे लाखों छात्रों और शिक्षकों को फायदा होगा। लियम विंट,...

भारतीयता के गायक येसुदास

टीम हिन्दी के. जे. येसुदास के सदाबहार नगमें किसी को भी मंत्रमुग्ध कर सकते हैं. येसुदास का यूं तो 60 दशक में ही फिल्‍मी गायिकी का करियर शुरू हो चुका था, लेकिन उन्‍हें असली पहचान मिली 70 के दशक के आखिरी सालों में. बासु चटर्जी...

पूरी दुनिया माने भारतीय स्थापत्य कला को

टीम हिन्दी भारत के स्थापत्य की जड़ें यहाँ के इतिहास, दर्शन एवं संस्कृति में निहित हैं। भारत की वास्तुकला यहाँ की परम्परागत एवं बाहरी प्रभावों का मिश्रण है। स्थापत्य व वास्तुकला के दृष्टिकोण से हड़प्पा संस्कृति तत्कालीन संस्कृतियों से काफ़ी ज़्यादा आगे थी। भारतीय स्थापत्य...

भारत का गौरव: ज्योतिष

टीम हिन्दी ज्योतिष शास्त्र का उद्भव आज से कई हजारों वर्ष पहले हुआ था। यह अपनी प्रमाणिकता के कारण पूर्व काल में ही तीन स्कन्धों में विभक्त हुआ था। जिसमें सिद्धान्त, संहिता एवं होरा शास्त्र है। किन्तु धीरे-धीरे ज्योतिष और प्रखर व विकसित होता चला...