धारावाहिक

ग्रामीण सोच, परिवेश को परदे पर उतारती लापतागंज

टीम हिन्दी भारत गांवों में बसता है. गांव यानी समाज. सामाजिक सरोकार से सराबोर वहां के लोग. शहरों-महानगरों वाली समृद्धि नहीं हो वहां, लेकिन मानवीय संवेदना हरेक के पास है. संवेदनाओं को हंसी के पुट के साथ करोड़ों लोगों तक पहुंचाया है शरद जोशी ने....

जब चलता था दूरदर्शन पर ‘हमलोग’

आज भले ही लोग दूरदर्शन को नहीं देखते हों. आज की पीढ़ी को उसके कार्यक्रम पसंद नहीं आते हों. लेकिन, एक समय था जब दूरदर्शन के अलावा कुछ भी नहीं था. जब रेडियो के बाद मनोरंजन का साधन टेलीविजन बना, तो वह एक सामाजिक प्रतिष्ठा...