बिहारी के काव्य

बिहारी के दोहे में सामाजिक संदेश

टीम हिन्दी बिहारी शाहजहाँ के समकालीन थे और राजा जयसिंह के राजकवि थे। राजा जयसिंह अपने विवाह के बाद अपनी नव-वधू के प्रेम में राज्य की तरफ बिलकुल ध्यान नहीं दे रहे थे तब बिहारी ने उन्हें यह दोहा सुनाया था- नहिं पराग नहिं मधुर...