रहीम के दोहे में सामाजिक समरसता

रहीम के दोहे में सामाजिक समरसता

टीम हिन्दी दोहे की प्रकृति ‘गागर में सागर’ भरने की होती है। दिल की जितनी गहराई से उठा भाव दोहे की शक्ल लेता है, उतना ही गहरा होता है उसका घाव। रहीम के दोहों में ये दोनों खूबियाँ हैं। उनमें तेज धार है और ग़जब...