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हिन्दी के साथ बढ़ें, सुगति सोपान के आयोजन में वक्ताओं की राय

नई दिल्ली। हिन्दी के प्रख्यात कवि रामधारी सिंह दिनकर राष्ट्रवाद के नायक थे। उनकी राष्ट्र भावना समिति नहीं थी। उनकी राष्ट्रीय चेतना संकीर्ण चेतना में नहीं बंधी थी। उनकी तमाम रचनाओं को जब हम पढ़ते हैं, तो यह बात स्वयमेव समझ में आ जाती है,...