short story by anjana jha

चौथी पारी

उम्र का तीसरा पड़ाव भी समाप्त होने को था। अपने जीवन की जिम्मेदारियाँ लगभग पूरी कर चुके थे तरूण। तीनों बच्चे खुश थे अपनी जिंदगी में। अवकाश प्राप्ति के बस कुछ ही दिन शेष बचे थे। एक तरफ आपाधापी की जिंदगी से मुक्त होने का...