short story in hindi

चौथी पारी

उम्र का तीसरा पड़ाव भी समाप्त होने को था। अपने जीवन की जिम्मेदारियाँ लगभग पूरी कर चुके थे तरूण। तीनों बच्चे खुश थे अपनी जिंदगी में। अवकाश प्राप्ति के बस कुछ ही दिन शेष बचे थे। एक तरफ आपाधापी की जिंदगी से मुक्त होने का...

स्त्री का अस्तित्व

रूपा तीन विद्यालयों की संचालिका है। इतनी कर्मठ महिला अपने आप सम्मान की पात्रा हो जाती है। कितने को ही रोजगार देने में सक्षम । एक समय ऐसा भी था जब वह अपनी जिंदगी से निराश हो चुकी थी। जीवन का चक्र तो अनवरत चलता...