social work

नानाजी देशमुख: समाजसेवा के लिए जिन्होंने अपना सबकुछ छोड़ा

टीम हिन्दी जब तक व्यक्ति में स्व का भाव होता है, वह समाज और देश के लिए विशेष नहीं कर सकता है। स्व यानी अपना। स्वयं का। अपनों का। जिसने भी अपना स्व छोड़ा, उसने एक बड़ी लकीर खींची। ऐसे ही बड़ी लकीर खींची समाजसेवी...