thehindi.in

संगीत सरिता: चाय की चुस्कियों के संग आनंद

“श्रोताओं आज हमारे साथ हमारे कार्यक्रम में गुलजार और ----???” आप सभी को यह वाक्य तो याद ही होगा. अगर नहीं याद तो मैं याद दिलाता हूं. ‘संगीत सरिता’, दोस्तों कुछ याद आया? यह वही कार्यक्रम है, जहां यह वाक्य हम रोजाना सुना करते थे....

सांप है पाप, तो सीढ़ी है पुण्य

सांप-सीढ़ी का खेल बचपन में हम सभी ने एक बार तो जरूर खेला होगा. अब आप कहेंगे कि एक बार नहीं कई बार खेला है. इस खेल का महत्व तो सिर्फ नब्बे के दशक की पीढ़ी ही समझ सकती है. उस समय ना आज के...

पैरों की धूल नहीं, माथे का चंदन है नारी

कहते हैं नारी जब शांत है, तब लक्ष्मी है. जब रौद्र रूप में आ जाए, तो महाकाली जैसी हो जाती है. एक नारी से दो घर जुड़ते हैं. दो परिवारों में खुशियां आती हैं. घर की नींव मजबूत करने का हौसला सिर्फ एक नारी के...

हर व्यंजन की जान है चटनी

हमें खाने में चटपटा मिल जाए, तो स्वाद कई गुना बढ़ जाता है. बात जैसे ही चटनी की होती है, तो मुंह में पानी आ जाता है. भूख बढ़ जाती है. आँखों के सामने तरह-तरह के व्यंजन दिखने लगते हैं. कभी-कभी खाना अधूरा सा लगता है....

क्यों है छप्पन भोग की मान्यता?

छप्पन भोग क्या होता है और इसे क्यों भगवान को प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है ? यह सवाल आपके मन में भी आता होगा. आज हम इससे जुड़ी जानकारी आपके साथ साझा करते हैं. क्या कारण और कहानी है इसके पीछे, आपको बताते...

महादेवी वर्मा : जिन्होंने व्यथा को भी दिया सौंदर्य

वे मुस्काते फूल, नहीं जिनको आता है मुरझाना, वे तारों के दीप, नहीं जिनको भाता है बुझ जाना जब हम किसी रचना को पढ़ते हैं, तो उस रचना में इतनी ताकत होती है कि उनके एक-एक शब्द को हम जीने लगते हैं. उन रचनाओं में...
Kabaddi 1

पुरुषों के साथ महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है कबड्डी में

फ़िजी : यहाँ लोगों के दिलों में बसता है भारत

जब भी हम दूसरे देश में अपने देश की भाषा सुनते हैं, तो दिल को सुकून मिलता है. सुकून इसलिए क्योंकि पराए देश में कोई अपना मिल जाए तो अपने देश से दूर रहने का एहसास ही नहीं होता. भारतीय हर देश, हर द्विप पर...

नए मानक गढ़ती हिंदी

किसी भी राष्ट्र की पहचान उसकी भाषा और संस्कृति से होती है. 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से निर्णय लिया कि हिंदी ही भारत की राजभाषा होगी. देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने कहा कि इस दिन के महत्व देखते...
Noushad 1.

जब सफलता की गारंटी बन गया था नौशाद साहब का नाम

‘मन तड़पत हरी दर्शन को आज’, ‘नन्हा मुन्हा राही हूँ’, ‘यह गोटेदार लहंगा निकलू जब डाल के’, जैसे गाने आज कहाँ बनते हैं? आज तो धूम-धड़ाका वाले गाने ज्यादा पसंद किए जाते हैं. गानों की हम जब बात करते हैं, तो उसका संगीत और बोल...
Hindi New Media

पत्रकारिता को मजबूती प्रदान कर रही है हमारी हिंदी

पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है. लोकतंत्र तभी मजबूत होगा, जब पत्रकारिता अपनी सार्थक भूमिका निभाए. सार्थक पत्रकारिता का उदेश्य है कि वह प्रशासन और समाज के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बने. समय के साथ हिंदी पत्रकारिता समर्थ होती जा रही है. हिंदी...

हिंदी सिनेमा के एक्टर्स: खाते देशी, बातें विदेशी

भारत में वैसे तो बहुत सी भाषाओँ में फ़िल्में बनती है, और उसका अपना एक दर्शक वर्ग भी है. लेकिन इन सभी फिल्मों के एक्टर्स में एक बात कॉमन है, ये बातें सिर्फ अंग्रेजी में ही करना पसंद करते हैं. भोजपुरी, दक्षिण भारतीय या किसी...

फणीश्वर नाथ ‘ रेणु ‘ : मानवीय संवेदनाओं को उकेरता एक साहित्यकार

मानवीय दृष्टि से संपन्न एक कथाकार ने बिहार के एक छोटे से भूखंड की हथेली पर किसानों की नियति को अपने कहानियों के माध्यम से उजागर करने का काम किया. कहा जाता है कि आंचलिक भाषा को हिंदी साहित्य में एक अलग स्थान दिलाने का...
Haat Thehindi.in

कृषि और संस्कृति के मेल का केंद्र है हाट बाजार

गाँव में लगने वाले स्थानीय बाजार को हाट कहते हैं, जहाँ गाँव के लोगों की सामान्य जरूरतों को पूरा किया जाता है. सदियों से भारत के गांवों को आत्मनिर्भर करने में हाट की भूमिका रही है. हाट कृषि और संस्कृति के मेल का केंद्र हुआ...
138

हवन एक, फायदे अनेक