सांप-सीढ़ी का खेल बचपन में हम सभी ने एक बार तो जरूर खेला होगा. अब आप कहेंगे कि एक बार नहीं कई बार खेला है. इस खेल का महत्व तो सिर्फ नब्बे के दशक की पीढ़ी ही समझ सकती है. उस समय ना आज के...
कहते हैं नारी जब शांत है, तब लक्ष्मी है. जब रौद्र रूप में आ जाए, तो महाकाली जैसी हो जाती है. एक नारी से दो घर जुड़ते हैं. दो परिवारों में खुशियां आती हैं. घर की नींव मजबूत करने का हौसला सिर्फ एक नारी के...
हमें खाने में चटपटा मिल जाए, तो स्वाद कई गुना बढ़ जाता है. बात जैसे ही चटनी की होती है, तो मुंह में पानी आ जाता है. भूख बढ़ जाती है. आँखों के सामने तरह-तरह के व्यंजन दिखने लगते हैं. कभी-कभी खाना अधूरा सा लगता है....
छप्पन भोग क्या होता है और इसे क्यों भगवान को प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है ? यह सवाल आपके मन में भी आता होगा. आज हम इससे जुड़ी जानकारी आपके साथ साझा करते हैं. क्या कारण और कहानी है इसके पीछे, आपको बताते...
वे मुस्काते फूल, नहीं जिनको आता है मुरझाना, वे तारों के दीप, नहीं जिनको भाता है बुझ जाना जब हम किसी रचना को पढ़ते हैं, तो उस रचना में इतनी ताकत होती है कि उनके एक-एक शब्द को हम जीने लगते हैं. उन रचनाओं में...
जब भी हम दूसरे देश में अपने देश की भाषा सुनते हैं, तो दिल को सुकून मिलता है. सुकून इसलिए क्योंकि पराए देश में कोई अपना मिल जाए तो अपने देश से दूर रहने का एहसास ही नहीं होता. भारतीय हर देश, हर द्विप पर...
किसी भी राष्ट्र की पहचान उसकी भाषा और संस्कृति से होती है. 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से निर्णय लिया कि हिंदी ही भारत की राजभाषा होगी. देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने कहा कि इस दिन के महत्व देखते...
‘मन तड़पत हरी दर्शन को आज’, ‘नन्हा मुन्हा राही हूँ’, ‘यह गोटेदार लहंगा निकलू जब डाल के’, जैसे गाने आज कहाँ बनते हैं? आज तो धूम-धड़ाका वाले गाने ज्यादा पसंद किए जाते हैं. गानों की हम जब बात करते हैं, तो उसका संगीत और बोल...
पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है. लोकतंत्र तभी मजबूत होगा, जब पत्रकारिता अपनी सार्थक भूमिका निभाए. सार्थक पत्रकारिता का उदेश्य है कि वह प्रशासन और समाज के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बने. समय के साथ हिंदी पत्रकारिता समर्थ होती जा रही है. हिंदी...
भारत में वैसे तो बहुत सी भाषाओँ में फ़िल्में बनती है, और उसका अपना एक दर्शक वर्ग भी है. लेकिन इन सभी फिल्मों के एक्टर्स में एक बात कॉमन है, ये बातें सिर्फ अंग्रेजी में ही करना पसंद करते हैं. भोजपुरी, दक्षिण भारतीय या किसी...
मानवीय दृष्टि से संपन्न एक कथाकार ने बिहार के एक छोटे से भूखंड की हथेली पर किसानों की नियति को अपने कहानियों के माध्यम से उजागर करने का काम किया. कहा जाता है कि आंचलिक भाषा को हिंदी साहित्य में एक अलग स्थान दिलाने का...
गाँव में लगने वाले स्थानीय बाजार को हाट कहते हैं, जहाँ गाँव के लोगों की सामान्य जरूरतों को पूरा किया जाता है. सदियों से भारत के गांवों को आत्मनिर्भर करने में हाट की भूमिका रही है. हाट कृषि और संस्कृति के मेल का केंद्र हुआ...
जीन्स- टी-शर्ट, वनपिस, हॉट पैंट-क्रॉप टॉप, पहनी लड़कियों के बीच अगर एक साड़ी पहने लड़की हो, तो हर कोई उस साड़ी वाली लड़की को ही देखता है. ऐसा इसलिए नहीं होता कि वह बहनजी लग रही होगी. ऐसा इसलिए क्योंकि वह सभी लड़कियों से अलग...