पुस्तक

पुस्तक जैसा कोई नहीं: विशाल सहाय

येषां न विद्या न तपो न दानं, ज्ञानं न शीलं न गुणो न धर्मः। ते मर्त्यलोके भुविभारभूता, मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति॥ भावार्थ: जिन लोगों के पास न तो विद्या है, न तप, न दान, न शील, न गुण और न धर्म। वे लोग इस पृथ्वी पर भार...

हिन्दी के पुरोधा महेश चंद्र शर्मा पुस्तक का हुआ विमोचन

पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. महेश शर्मा ने कहा कि कोई भी विद्यार्थी जब अपनी मातृभाषा में शिक्षा ग्रहण करता है, तो उसे जल्दी और बेहतर समझ आती है. यह कई शोधों में भी सिद्ध हो चुका है. जब कोई हिन्दी भाषी राज्य का लड़का इंजीनियरिंग...