आर. के. लक्ष्मण के कार्टून बोलते थे।

एक आम आदमी की सशक्त आवाज माने जाने वाले कार्टूनिस्ट आर. के. लक्ष्मण को भारत के प्रमुख व्यंग्य चित्रकार के रूप में ख्याति प्राप्त है। आर. के. लक्ष्मण का पूरा नाम ‘रासीपुरम कृष्णस्वामी लक्ष्मण’ था। उनका जन्म 24 अक्टूबर, 1921 को मैसूर, कर्नाटक में हुआ।...

आइए जाने गेहूँ के बारे में

गेहूँ एक ऐसा अनाज, एक ऐसी औषधि है जिसका प्रयोग मानव अपने जीवनयापन के लिए मुख्यतः रोटी के रूप में करता आया है। गेहूँ रबी की फसल है जो कि मुख्यतः विश्व के दो मौसमों, यानी शीत एवं वसंत ऋतु में उगाई जाती है। शीतकालीन...

हिन्दी का एक दिन नहीं होता, हर दिन होता है हिन्दी का – तरुण शर्मा

हिन्दी हमारे लिए महज एक भाषा नहीं, हमारी मां है। सनातनी परंपरा में मां के लिए कोई खास दिन नहीं होता है। हर दिन तो मां से शुरू होती है। मां के आशीष से। मां की ममता से। मां के वात्सल्य से। मां है तो...
Osho Rajneesh

सीधा ओर सरल जीवन पथ दिया – गुरू रजनीश ‘ओशो’ ने

अपने संपूर्ण जीवनकाल में आचार्य रजनीश को एक विवादास्पद रहस्यदर्शी, गुरु और आध्यात्मिक शिक्षक के रूप में देखा गया है . वे धार्मिक रूढ़िवादिता के बहुत कठोर आलोचक थे, जिसकी वजह से वह बहुत ही जल्दी विवादित हो गए और ताउम्र विवादित ही रहे. 11...
Brahmi

तीक्ष्ण बुद्धि के लिए उपयोगी – ब्राह्मी

प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति रोगों को जड़ से खत्म करने के लिए अत्यंत लाभकारी हैं. ऐसे लोगों के लिए प्रकृति का दिया हुआ वरदान है ब्राह्मी. ब्राह्मी एक औषधीय पौधा है जो गीली जमीन पर फैलकर बड़ा होता है. इसके तने और पत्तियां मुलामय, गूदेदार और...
Save Water

जल – आज और कल

सनातन परंपराओं में प्रकृति संरक्षण के सूत्र मौजूद हैं। हमारे यहां प्रकृति पूजन को प्रकृति संरक्षण के तौर पर मान्यता है। भारत में पेड़-पौधों, नदी-पर्वत, ग्रह-नक्षत्र, अग्नि-वायु सहित प्रकृति के विभिन्न रूपों के साथ मानवीय रिश्ते जोड़े गए हैं। पेड़ की तुलना संतान से की...
Teacher Day

राष्ट्र निर्माण के लिए प्रतिबद्ध – हमारे शिक्षक

“अगर कोई देश भ्रष्टाचार मुक्त है और सभी तरह से सुंदर राष्ट्र बन गया है, तो मुझे दृढ़ता से लगता है कि तीन प्रमुख सामाजिक सदस्य हैं जिनका इसमें योगदान हो सकता है. वे पिता, माता और शिक्षक हैं।” भारत में शिक्षकों की पूजा करने...
Yoga

संतुलित दिनचर्या, स्वस्थ जीवन का आधार

एक नहीं, कई मंत्र हैं। लोकाचार में कई कहावते हैं, जो कहते हैं कि यदि आपको स्वस्थ रहना है, तो संतुलित दिनचर्या अपनाना होगा। दुनिया के किसी भी भाषा को आप खंगाल लें, उसमें यह संदेश मिल ही जाएगा। जो बात आज तक हम अपने...

आज के युवाओं का यही है हाल, आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपया

21वीं सदी को युवाओं की सदी कहा जाता है। क्या आपने कभी इस पर विचार किया है कि युवाओं का हाल क्या है ? दिखने में स्मार्ट, चलने के लिए अपनी कार, जेब में कई बैंकों का के्रेडिट कार्ड। लेकिन वास्तविकता क्या है ? इस...
Fire Meditation

प्राचीन ऋषि-मुनियों की रोगोपचार हेतु पुरातन चिकित्सा पद्धति: अग्निहोत्र – रक्षा पंड्या

प्राचीनकाल में भारत 'आर्यावर्त' नाम से जाना जाता था। और इस आर्यावर्त का अर्थ होता था- 'सभ्य, सुसंस्कृत लोगों का देश, हमारे ऋषि-मुनियों का देश!' ये वो देश था जहाँ विदेशों से लोग आध्यात्मवाद सीखने आते थे, जहाँ केवल ऋषि-मुनि व तपस्वी ही नहीं बल्कि...
Media Interview

हिन्दी के पतन के लिए कितने जिम्मेदार हैं हिन्दी न्यूज चैनल्स

हिन्दी...जिसे संविधान में राजभाषा का दर्जा प्राप्त है. भारत में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा हिन्दी है. लेकिन अक्सर सुना और देखा जा रहा है कि हिन्दी की अस्मिता को बचाने के लिए साहित्यकार और हिन्दी के चाहने वाले लोग ढ़ेरों प्रयास कर रह...
Vedik Gyan

आधुनिक समय में वैदिक ज्ञान का महत्व – पंकज जगन्नाथ जयस्वाल

ऐसा क्यों था कि हम भारतीय हमेशा इस बात को देखते हैं कि भारत के बारे में क्या गलत है और कभी इस बात की सराहना नहीं करते कि हमारे देश के बारे में क्या अच्छा है? एक राष्ट्र के रूप में हम समय की...
Vikas Divya Kriti

सिविल सर्विस परीक्षाओं में हिंदी व अन्य मातृभाषाओं के प्रबल समर्थक- डॉ. विकास दिव्यकिर्ती

आज के वक़्त में जब भी कोई सरकारी या सिविल सर्विस परीक्षा देने के बारे में सोचता है तो कहीं न कहीं उसके दिमाग में सबसे पहला ख़्याल यही आता है कि इस परीक्षा में पास होने के लिए अंग्रेज़ी भाषा का ज्ञान होना सबसे...
All Is Well

ऑल इज होगा वेल, जब वैदिक तरीके से मनाएंगे जन्मदिन

वर्ष 2020 को आप कैसे याद करेंगे ? यदि आपसे यह पूछा जाए तो आप तपाक से इसे कोरोना को लेकर याद करने की बात करेंगे। जरा ठहरिए। कभी आपने सोचा है कि कोरोना ने आपको क्या दिया ? कितना छिना और कितना दिया ?...
Unity

धार्मिक और सामाजिक समरसता का प्रतीक: हमारा भारत

“बहु भाव व एकत्व भव"  अर्थात् 'एकरूपता ही समरसता का वास्तविक अर्थ है।' हमारी भारत भूमि संतों, मुनियों और राष्ट्रभक्तों के खून पसीने से सींची गई तपोभूमि है जिसने दुनिया को समरसता का संदेश दिया। भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता ही यही है कि...