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देवकी नंदन खत्री : भारतीय साइंस फिक्शन के जनक 

आजकल विदेशों में जिस तरह की साइंस फिक्शन फिल्मे बन रही है, क्या आप जानते हैं कि भारत में आज से तक़रीबन 150 साल पहले देवकीनंदन खत्री ने चंद्रकांता संतति जैसी उपन्यांस लिखकर इसकी शुरुआत कर दी थी. स्पाइडरमैन, जुमान्ज़ी, अवेंजेर्स और हैरी पॉटर में जिस...

दिल्ली : सात बार उजड़ी, फिर बसी हूं मैं

मैं दिल्ली हूँ, आज मैं जैसी दिख रही हूँ वैसी कभी रही नहीं. कई बार मुझे बसाया गया और उजाड़ा गया. भारत की आज़ादी से पहले और आज़ादी के बाद मैं ही सभी राजाओं की पहली पसंद रही हूँ, सभी मुझ पर ही शासन करना चाहते हैं,...

वास्तु: विज्ञान और परंपरा का संगम

भारत एक ऐसा देश है जहाँ लोग विज्ञान को भी मानते हैं और विज्ञान से परे दुनिया को भी. विज्ञान दुनिया की हर सुख-सुविधा को आसान बना देता है. एक व्यक्ति की ज़रूरत का ख्याल रखने से लेकर दुनिया को तरक्की की ऊँचाइयों तक पहुचने...

देव आनंद जूझते रहे आपातकाल में

‘पल भरके लिए कोई हमें प्यार कर ले झूठा ही सही’, ‘गाता रहे मेरा दिल’, ‘ऐसे न मुझे तुम देखो’, जैसे गानों से प्यार की बौछार करने वाले सदाबहार अभिनेता देव आनंद जिन पर हसिनाएं जान लुटाती थीं. जिन्हें देखकर लड़कियां मर-मिटती थी, जिनको लोग...

इमरती का स्वाद नहीं चखा तो क्या चखा !

जब भी हम कोई खुशखबरी सुनते हैं तो मिठाई खा कर मुंह मीठा करते हैं. हर खुशी में जो साथ निभाता है वो है मिठाई. आप भारत में कहीं भी चले जाइए आपको मिठाईयों का भंडार मिलेगा. हर गली, नुक्कर पर मिठाई की दुकान न...

भारतीय खान-पान की शान है पान

पान का नाम लेने से एक रसीला स्वाद का अनुभव होता है और मन ताजगी से भर उठता है. भारतीय इतिहास और परंपराओं से जुड़ा हुआ पान एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. पान को विभिन भाषाओं में अलग अलग नामों से जाना जाता है. पान को...

कहानी हरियाणा के तीन लाल की

यह 1966 ई. की बात है, जब हरियाणा नया राज्य बना था. राज्य बनते ही हरियाणा की राजनीति में तख्तापलट का खेल शुरू हो गया था. ये वह दौर था, जब सरकारें आ रही थी और जा रही थी. उस समय हिंदी की एक कहावत...

जब सच कहने की सजा मिली किशोर कुमार और देवानंद को

क्या आपको पता है कि पाश्र्व गायक किशोर कुमार के गाने पर रोक लिया दिया गया था ? घटना उस समय की है, जब देश में आपातकाल लगाया गया था. उस समय उनके गाने पर से रोक हटाने में बाॅलीवुड अभिनेता देव आनंद की बड़ी...

संगीत सरिता: चाय की चुस्कियों के संग आनंद

“श्रोताओं आज हमारे साथ हमारे कार्यक्रम में गुलजार और ----???” आप सभी को यह वाक्य तो याद ही होगा. अगर नहीं याद तो मैं याद दिलाता हूं. ‘संगीत सरिता’, दोस्तों कुछ याद आया? यह वही कार्यक्रम है, जहां यह वाक्य हम रोजाना सुना करते थे....

सांप है पाप, तो सीढ़ी है पुण्य

सांप-सीढ़ी का खेल बचपन में हम सभी ने एक बार तो जरूर खेला होगा. अब आप कहेंगे कि एक बार नहीं कई बार खेला है. इस खेल का महत्व तो सिर्फ नब्बे के दशक की पीढ़ी ही समझ सकती है. उस समय ना आज के...