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कॉम्पैक्ट डिस्क (सीडी) की एबीसीडी

जमाना खुद को दोहराता है - बात साबित हो गयी है जनाब। सीडी 15-20 साल पहले समसामयिक थी, अब मुख्य धारा से दूर छिंटक के विपक्ष में बैठ गयी है। वो तो भला हो पार्टी लेबलधारी महानुभावों का जिन्होंने सीडी को विलुप्त होने से रोका...

राजनीतिक शुचिता की मिसाल थी सुषमा स्वराज

 डॉ. नंद किशोर गर्ग  सुषमा स्वराज अब इस दुनिया में नहीं हैं। उनके न होने का अहसास मुझे अब तक नहीं हो रहा है। ऐसा लगता है मानो वह एक बार फिर मेरे सामने होंगी और हंसते हुए अपने चिरपरिचत अंदाज में कहेंगी कैसे है...

पूरी तरह से स्वदेशी कंपनी है महिन्द्रा

टीम हिन्दी महिंद्रा समूह भारत के सबसे प्रतिष्ठित 10 शीर्ष औद्योगिक घरानों में से एक है. इस प्रसिद्ध समूह को लुधियाना (पंजाब) में आनंद महिंद्रा के दादा बंधुओं जगदीशचंद्र व कैलाशचंद्र महिंद्रा (के.सी. महिंद्रा) द्वारा स्थापित किया गया था. आनंद महिंद्रा, महिंद्रा समूह की प्रमुख...

लॉकडाउन: आइये घर पर रहकर कुछ तूफानी करते हैं!

भारत में कोरोना की भयावहता को देख कर 70 से अधिक जिलों को लॉकडाउन कर दिया है। लोगों को घरों के अंदर रहने की हिदायत दी जा रही है। प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों को यदि संभव है तो अपने घरों से कार्य करने की छूट...

भारत का गौरव: हिमालय

टीम हिन्दी हिमालय भारत की धरोहर है। हिमालय पर्वत की एक चोटी का नाम 'बन्दरपुच्छ' है। यह चोटी उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल ज़िले में स्थित है। इसकी ऊँचाई 20,731 फुट है। इसे सुमेरु भी कहते हैं। हिमालय एक पूरी पर्वत शृंखला है, जो भारतीय उपमहाद्वीप...

विश्व भर में पहुँच है हमारी हिन्दी की

यदि यह कहा जाए कि 21वीं विज्ञान एवं तकनीक के सहारे पूरी दुनिया एक वैश्विक गाँव में तब्दील हो रही है और स्थलीय व भौगोलिक दूरियां अपनी अर्थवत्ता खो रहीं हैं, तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी. वर्तमान विश्व व्यवस्था आर्थिक और व्यापारिक आधार पर ध्रुवीकरण...

इतिहास के पन्नों में अशोक-1

अशोक स्तब्ध थे! कलिंग विजय ने आखिर उन्हें क्या मिला यह सोच वह रथ से पैदल ही उतर आए। चारों तरफ रक्त रंजित शव बिखरे हुए थे। उन शवों से उठने वाली दुर्गन्ध ने अशोक की साँसों को जैसे रोक दिया हो। बच्चे बूढ़े और जवानों की लाशों पर...

एमिल फार्मास्यूटिकल बनी दुनिया की पहली कंपनी जिसने बनाई हर्बल एंटी-बायोटिक दवाई!

बात बात पर एंटी-बायोटिक खाने वालों के लिए खुशखबरी है कि आयुर्वेद ने भी हर्बल एंटी-बायोटिक दवाई की खोज कर ली है। जी आपने बिलकुल ठीक सुना आयुर्वेदिक दवाई बनाने वाली एमिल फार्मास्यूटिकल ऐसी पहली कंपनी बनी जिसने फीफाट्रोल नाम की  हर्बल एंटी-बायोटिक टेबलेट तैयार की...

लोगों का झुकाव बढ़ रहा है प्राकृतिक चिकित्सा की ओर

टीम हिन्दी प्राकृतिक चिकित्सा कई चिकित्साओ से मिलकर बना है जैसे कि जल चिकित्सा,सूर्य चिकित्सा,मृदा चिकित्सा, आयुर्वेद, योग, आदि पद्धतियों से मिलकर बना है. ऐसा मानना है कि सबसे पुरानी चिकित्सा पद्धति यही है. इस चिकित्सा का मूल आधार यह है कि अगर आपका खान...

भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की त्रिमूर्ति भारत के लिए रहेगी वंदनीय!

"वे झूल गए थे फांसी पर मेरी आज़ादी की खातिर"  कुछ एहसान ऐसे होते हैं जिनको हम कभी नहीं उतार सकते। भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की त्रिमूर्ति सदा से भारत के लिए वंदनीय थी है और रहेगी। 8 अप्रैल 1929 को अंग्रेजों की बहरी...

निर्भया के गुनहगारों की फांसी पर लोग खुश हो रहे हैं लेकिन एक फांसी के बाद खुल गए थे भारत की स्वतंत्रता के द्वार! 

निर्भया हत्याकांड के गुनहगार लगभग सात साल बाद अपने अंजाम पर पहुंच गए। निर्भया केस के चारों दोषियों को आज सुबह 5:30 बजे तिहाड़ जेल में फांसी पर लटका दिया गया। इस तरह हजारों कानूनी अड़चनों के बाद निर्भया को इन्साफ मिला। भारत में ऐसे...

ओरछा जितना पौराणिक उतना ही ऐतिहासिक भी!

मध्यप्रदेश का ओरछा जमुना की सहायक नदी बेतवा नदी के किनारे बसा एक पौराणिक शहर है। ओरछा भारतीय इतिहास की स्थापत्य कला का बेजौड़ नमूना है। इसी खूबी के कारण यह देश विदेश के सैलानियों के लिए कौतुहल का विषय है। गंगा यमुनी संस्कृति की...

नवरात्रों में माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा के लिए कलश स्थापना क्यों है आवश्यक?

नवरात्र यानि नौ दिनों का उत्सव। उत्सव माँ दुर्गा की शक्ति का, उत्सव माँ आदि की भक्ति का! नौ रात्रियाँ माँ दुर्गा के नौ रूपों से सम्बंधित हैं। बुधवार 25 मार्च 2020 से चैत्र नवरात्रि का आरंभ हो रहा है। चैत्र मास के शुक्लपक्ष की...

कल्पना चावला जन्मदिन विशेष- आने वाली पीढ़ियों के लिए उम्मीदों का आकाश!

"मैं अंतरिक्ष के लिए बनी हूं और इसी के लिए मरूंगी"- कल्पना चावला, जो उन्होंने कहा वह सच साबित हुआ। 1 फरवरी 2003 को पूरा संसार कल्पना चावला के अन्तरिक्ष से धरती पर सकुशल वापसी की कामना कर रहा था। लेकिन नियति ने शायद कुछ...

मोबाइल की आभासी दुनिया में मलखम्ब जैसे खेल कहीं लुप्त न हो जाएं!

वह भी क्या दिन थे जब शाम होते ही मोहल्लों की छोटी छोटी सडकें शोर से गूंजती रहती थी। ऐसा कोई पार्क नहीं होता था जहाँ बच्चों की टोलियाँ नहीं दिखती थी! खोखो, ताड़म ताड़ी, छिपम-छिपाई, गुल्लीडंडा, बाघ-बकरी, रस्सीकूद, पिट्ठू, लंगड़ी टांग, कंचे, लट्टू क्या...